श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 39: राजाओं का श्रीराम के लिये भेंट देना और श्रीराम का वह सब लेकर अपने मित्रों, वानरों, रीछों और राक्षसों को बाँट देना तथा वानर आदि का वहाँ सुखपूर्वक रहना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.39.28 
रामोऽपि रेमे तै: सार्धं वानरै: कामरूपिभि:।
राक्षसैश्च महावीर्यैर्ऋक्षैश्चैव महाबलै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भगवान् राम भी उन वानरों, अत्यन्त बलवान राक्षसों और महाबली भालुओं के साथ बड़े आनन्द से समय व्यतीत करते थे, जो अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते थे॥ 28॥
 
Lord Rama also used to spend time with great joy in the company of those monkeys, extremely powerful demons and mighty bears, who could assume any form according to their wish.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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