श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम का सभासदों के साथ राजसभा में बैठना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.37.5 
विक्रमस्ते यथा विष्णो रूपं चैवाश्विनोरिव।
बुद‍्ध्या बृहस्पतेस्तुल्य: प्रजापतिसमो ह्यसि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आपका पराक्रम भगवान विष्णु के समान है और आपकी सुन्दरता अश्विनीकुमारों के समान है। बुद्धि में आप बृहस्पति के समान हैं और प्रजापालन में आप साक्षात प्रजापति के समान हैं। 5॥
 
Your bravery is like that of Lord Vishnu and your beauty is like that of the Ashwini Kumaras. In intelligence you are like Jupiter and in caring for the people, you are like Prajapati in person. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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