| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 37: श्रीराम का सभासदों के साथ राजसभा में बैठना » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 7.37.22  | तथा परिवृतो राजा श्रीमद्भिर्ऋषिभिर्वरै:।
राजभिश्च महावीर्यैर्वानरैश्च सराक्षसै:॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार राजसभा में बैठे हुए, अनेक महान् एवं यशस्वी ऋषियों, पराक्रमी राजाओं, वानरों और राक्षसों से घिरे हुए, श्री रघुनाथजी अत्यंत शोभायमान हो रहे थे॥22॥ | | | | In this manner, seated in the royal court, surrounded by many great and illustrious sages, mighty kings, monkeys and demons, Sri Raghunatha was looking very splendid. ॥22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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