श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.36.9 
अनेन शिशुना कार्यं कर्तव्यं वो भविष्यति।
तद् ददध्वं वरान् सर्वे मारुतस्यास्य तुष्टये॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस बालक के द्वारा भविष्य में तुम्हारे बहुत से कार्य सिद्ध होंगे, अतः वायु देवता को प्रसन्न करने के लिए तुम सब लोग इस पर कृपा करो।’ ॥9॥
 
Many of your tasks will be accomplished in the future through this child, therefore, to please the Vayu deity, all of you should bless him.' ॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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