श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 62-63
 
 
श्लोक  7.36.62-63 
ततोऽस्तं भास्करे याते विसृज्य नृपवानरान्॥ ६२॥
संध्यामुपास्य विधिवत् तदा नरवरोत्तम:।
प्रवृत्तायां रजन्यां तु सोऽन्त:पुरचरोऽभवत्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सूर्यास्त के पश्चात् राजाओं और वानरों से विदा लेकर राजाओं में श्रेष्ठ श्री राम ने विधिपूर्वक संध्यावंदन किया और रात्रि होने पर वे अन्तःकक्ष में लौट आये।
 
Thereafter, after the sunset, having bid farewell to the kings and the monkeys, Sri Rama, the best of kings, performed the evening prayers as per the prescribed rituals and when the night fell, he returned to the inner chamber. 62-63.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे ष ट‍‍् त्रिंश: सर्ग: ॥ ३ ६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें छत्तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ ६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)