श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.36.6 
मरुद्रोधाद् विनिर्मुक्तास्ता: प्रजा मुदिताऽभवन्।
शीतवातविनिर्मुक्ता: पद्मिन्य इव साम्बुजा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वायु के अवरोध से मुक्त होकर सभी लोग सुखी हो गए। जैसे खिले हुए कमलों से भरी हुई क्यारियाँ हिमयुक्त वायु के प्रभाव से मुक्त होकर सुशोभित हो जाती हैं। ॥6॥
 
All the people became happy after being freed from the obstruction of the wind. Just like the flowerbeds filled with blooming lotuses become beautiful after being freed from the impact of the snow-laden wind. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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