श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.36.52 
श्रुत्वागस्त्यस्य कथितं राम: सौमित्रिरेव च।
विस्मयं परमं जग्मुर्वानरा राक्षसै: सह॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्यजी की यह बात सुनकर श्रीराम और लक्ष्मण को बड़ा आश्चर्य हुआ। वानर और राक्षस भी बहुत आश्चर्यचकित हुए।
 
Hearing this statement of Agastya, Shri Ram and Lakshman were very surprised. The monkeys and demons were also very surprised. 52.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd