श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.36.51 
तदेतत् कथितं सर्वं यन्मां त्वं परिपृच्छसि।
हनूमतो बालभावे कर्मैतत् कथितं मया॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! आपने जो कुछ पूछा था, वह सब मैंने आपको बता दिया है। हनुमानजी के बचपन की यह घटना भी मैंने आपको सुनाई है।
 
Raghunandan! I told you everything you asked me. I also narrated this incident of Hanuman's childhood.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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