| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना » श्लोक 49 |
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| | | | श्लोक 7.36.49  | एषेव चान्ये च महाकपीन्द्रा:
सुग्रीवमैन्दद्विविदा: सनीला:।
सतारतारेयनला: सरम्भा-
स्त्वत्कारणाद् राम सुरैर्हि सृष्टा:॥ ४९॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री राम! वास्तव में ये तथा इनके समान अन्य महान कपीश्वर सुग्रीव, मैन्द, द्विविद, नील, तारा, तरेया (अंगद), नल और रम्भ आदि देवताओं ने आपकी सहायता के लिए ही उत्पन्न किए हैं॥ 49॥ | | | | Sri Rama! In fact these and others like them who are great Kapishwaras like Sugreeva, Maind, Dwivid, Neel, Tara, Tareya (Angad), Nala and Rambha have been created by the gods to help you only.॥ 49॥ | | ✨ ai-generated | | |
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