श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.36.4 
स्पृष्टमात्रस्तत: सोऽथ सलीलं पद्मजन्मना।
जलसिक्तं यथा सस्यं पुनर्जीवितमाप्तवान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार सूखा खेत सींचने से हरा-भरा हो जाता है, उसी प्रकार ब्रह्माजी के करकमलों का स्पर्श पाकर बालक हनुमान पुनः जीवित हो उठे।
 
Just as a dry field becomes green after being watered, in the same way the child Hanuman became alive again after getting a playful touch of the lotus-like hand of Brahmaji.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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