बाधसे यत् समाश्रित्य बलमस्मान् प्लवङ्गम॥ ३४॥
तद् दीर्घकालं वेत्तासि नास्माकं शापमोहित:।
यदा ते स्मार्यते कीर्तिस्तदा ते वर्धते बलम्॥ ३५॥
अनुवाद
‘वीर वानर! तुम उस बल का आश्रय लेकर हमें कष्ट दे रहे हो, किन्तु हमारे शाप के कारण तुम उसे बहुत समय तक भूल जाओगे। तुम्हें अपने बल का ज्ञान भी नहीं होगा। जब कोई तुम्हें तुम्हारे यश का स्मरण कराएगा, तभी तुम्हारा बल बढ़ेगा।’॥34-35॥
‘Valiant monkey! You are harassing us by taking shelter of that strength, but you will forget it for a long time due to our curse. You will not even know about your strength. When someone reminds you of your fame, only then your strength will increase.’॥ 34-35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥