श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.36.29 
तरसा पूर्यमाणोऽपि तदा वानरपुङ्गव:।
आश्रमेषु महर्षीणामपराध्यति निर्भय:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों वानरराज हनुमानजी, वेगवान होकर निर्भय होकर ऋषियों के आश्रमों में जाकर उत्पात मचाते थे।
 
In those days Hanuman, the chief of the monkeys, full of speed, used to fearlessly go to the ashrams of the sages and create disturbance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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