श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.36.27 
सोऽपि गन्धवह: पुत्रं प्रगृह्य गृहमानयत्।
अञ्जनायास्तमाख्याय वरदत्तं विनिर्गत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
गंधवाहन वायु भी अपने पुत्र के साथ अंजना के घर आये और देवताओं द्वारा दिये गये वरदान के विषय में उन्हें बताकर चले गये।
 
Gandhavaahan Vayu also came to Anjana's house with his son and after telling her about the boon given to her by the gods, he left. 27.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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