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श्लोक 7.36.27  |
सोऽपि गन्धवह: पुत्रं प्रगृह्य गृहमानयत्।
अञ्जनायास्तमाख्याय वरदत्तं विनिर्गत:॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| गंधवाहन वायु भी अपने पुत्र के साथ अंजना के घर आये और देवताओं द्वारा दिये गये वरदान के विषय में उन्हें बताकर चले गये। |
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| Gandhavaahan Vayu also came to Anjana's house with his son and after telling her about the boon given to her by the gods, he left. 27. |
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