श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.36.26 
एवमुक्त्वा तमामन्त्र्य मारुतं त्वमरै: सह।
यथागतं ययु: सर्वे पितामहपुरोगमा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार हनुमान् को वर देकर और पवनदेवता की अनुमति लेकर ब्रह्मा आदि देवता जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार अपने-अपने स्थान को चले गये॥ 26॥
 
In this manner, after bestowing a boon to Hanuman and taking permission from the god of wind, Brahma and other gods went back to their places in the same manner in which they had come.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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