श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.36.23 
अमित्राणां भयकरो मित्राणामभयंकर:।
अजेयो भविता पुत्रस्तव मारुत मारुति:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मारुत! यह तुम्हारा पुत्र मारुति शत्रुओं के लिए भय उत्पन्न करने वाला और मित्रों के लिए रक्षा करने वाला होगा। युद्ध में इसे कोई भी पराजित नहीं कर सकेगा॥ 23॥
 
Marut! This son of yours, Maruti, will be fearsome for the enemies and a source of protection for the friends. No one will be able to defeat him in battle.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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