श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.36.22 
तत: सुराणां तु वरैर्दृष्ट्वा ह्येनमलङ्कृतम्।
चतुर्मुखस्तुष्टमना वायुमाह जगद‍्गुरु:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात देवताओं के वरदान से सुशोभित हनुमान जी को देखकर चतुर्मुख जगद्गुरु ब्रह्मा जी का हृदय प्रसन्न हो गया और उन्होंने वायुदेव से कहा- ॥22॥
 
After that, seeing Hanuman ji decorated with the boons of the gods, the heart of the four-faced Jagadguru Brahma ji became happy and he said to Vayudev - ॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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