श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.36.21 
दीर्घायुश्च महात्मा च ब्रह्मा तं प्राब्रवीद् वच:।
सर्वेषां ब्रह्मदण्डानामवध्योऽयं भविष्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अन्त में ब्रह्माजी ने उस बालक को लक्ष्य करके कहा - 'यह दीर्घायु होगा, महात्मा होगा और ब्रह्मा के सभी प्रकार के दण्डों से अजेय होगा।'॥21॥
 
At last Brahmaji targeted that child and said - 'He will live long, be a Mahatma and will be invincible from all types of Brahma's punishments'. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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