श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.36.20 
मत्कृतानि च शस्त्राणि यानि दिव्यानि तानि च।
तैरवध्यत्वमापन्नश्चिरजीवी भविष्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह बालक मेरे द्वारा निर्मित समस्त दिव्यास्त्रों से सुरक्षित रहकर दीर्घायु होगा।'
 
This child will live long, being protected from all the divine weapons created by me.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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