श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.36.19 
विश्वकर्मा च दृष्ट्वेमं बालसूर्योपमं शिशुम्।
शिल्पिनां प्रवर: प्रादाद् वरमस्य महामति:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
शिल्पियों में श्रेष्ठ और परम बुद्धिमान विश्वकर्मा ने बालक सूर्य के समान लालिमायुक्त उस बालक को देखकर उसे इस प्रकार आशीर्वाद दिया:॥19॥
 
Vishwakarma, the best amongst craftsmen and the most intelligent, beholding that child with a reddish radiance like the child sun, blessed him thus:॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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