श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.36.13 
मार्तण्डस्त्वब्रवीत् तत्र भगवांस्तिमिरापह:।
तेजसोऽस्य मदीयस्य ददामि शतिकां कलाम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब अंधकार का नाश करने वाले सूर्यदेव ने कहा, 'मैं उसे अपने तेज का सौवां भाग देता हूं।' 13.
 
Thereupon the Sun God, the destroyer of darkness, said, 'I give him one hundredth of my radiance.' 13.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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