श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 36: ब्रह्मा आदि देवताओं का हनुमान्जी को जीवित करके नाना प्रकारके वरदान देना और वायु का उन्हें लेकर अञ्जना के घर जाना, ऋषियों के शाप से हनुमान्जी को अपने बल की विस्मृति, श्रीराम का अगस्त्य आदि ऋषियों से अपने यज्ञ में पधारने के लिये प्रस्ताव करके उन्हें विदा देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.36.1 
तत: पितामहं दृष्ट्वा वायु: पुत्रवधार्दित:।
शिशुकं तं समादाय उत्तस्थौ धातुरग्रत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वायुदेवता अपने पुत्र की मृत्यु से बहुत दुःखी हुए। ब्रह्माजी को देखते ही वे बालक को गोद में लेकर उनके सामने खड़े हो गए॥1॥
 
‘Vayu Devta was very sad due to the death of his son. On seeing Brahmaji, he stood before him holding the child.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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