श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.35.64 
तत: प्रजाभि: सहित: प्रजापति:
सदेवगन्धर्वभुजङ्गगुह्यकै:।
जगाम तत्रास्यति यत्र मारुत:
सुतं सुरेन्द्राभिहतं प्रगृह्य स:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं, गन्धर्वों, नागों और गुह्यक आदि लोगों के साथ प्रजापति ब्रह्माजी उस स्थान पर गए जहाँ वायुदेव अपने उस पुत्र के साथ बैठे थे जिसे इन्द्र ने मारा था॥64॥
 
After that, Prajapati Brahmaji along with the gods, Gandharva, Naga and Guhyak etc. people went to the place where Vayudev was sitting with his son who was killed by Indra. 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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