श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.35.6 
सेनाग्रगा मन्त्रिसुता: किंकरा रावणात्मज:।
एते हनुमता तत्र एकेन विनिपातिता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अशोकवन में उन्होंने अकेले ही रावण के सेनापतियों, मन्त्रीकुमारों, किंकर और रावण के पुत्र अक्ष को मार डाला ॥6॥
 
There in Ashokavan, he single-handedly killed Ravana's generals, Mantrikumars, Kinkars and Ravana's son Aksha. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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