श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.35.53 
तत: प्रजा: सगन्धर्वा: सदेवासुरमानुषा:।
प्रजापतिं समाधावन् दु:खिताश्च सुखेच्छया॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तब गन्धर्व, देवता, दानव और मनुष्य आदि सभी लोग दुःखी होकर सुख प्राप्ति की इच्छा से प्रजापति ब्रह्माजी के पास दौड़े॥53॥
 
Then all the people like Gandharvas, gods, demons and humans etc. became distressed and ran to Prajapati Brahmaji with the desire to get happiness. 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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