श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.35.49 
प्रचारं स तु संगृह्य प्रजास्वन्तर्गत: प्रभु:।
गुहां प्रविष्ट: स्वसुतं शिशुमादाय मारुत:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
महाबली मरुत ने सम्पूर्ण प्रजा के भीतर निवास करते हुए अपनी गति वहीं समेट ली - श्वास आदि की गति रोक दी और अपने शिशु पुत्र हनुमान्‌जी को साथ लेकर एक पर्वत की गुफा में प्रवेश कर गए॥ 49॥
 
The powerful Marut, while residing within the entire population, withdrew his movement there - stopped movement in the form of breath etc. and along with his infant son Hanuman he entered a mountain cave.॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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