श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.35.41 
उत्सृज्यार्कमिमं राम प्रधावन्तं प्लवङ्गमम्।
अवेक्ष्यैवं परावृत्तो मुखशेष: पराङ्मुख:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! सूर्य को छोड़कर अपनी ओर आते हुए हनुमानजी को देखकर, केवल मुख शेष रह गया राहु पीछे मुड़कर भाग गया॥ 41॥
 
Shri Ram! On seeing the monkey Hanuman who had left the Sun and was charging towards him, Rahu whose face was only left, turned back and ran away.॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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