श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.35.31 
यमेव दिवसं ह्येष ग्रहीतुं भास्करं प्लुत:।
तमेव दिवसं राहुर्जिघृक्षति दिवाकरम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘जिस दिन हनुमान सूर्य को पकड़ने के लिए कूदे, उसी दिन राहु सूर्य को ग्रहण करना चाहता था ॥31॥
 
‘The day Hanuman jumped to catch the Sun, Rahu wanted to eclipse the Sun. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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