श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.35.29 
बहुयोजनसाहस्रं क्रमन्नेव गतोऽम्बरम्।
पितुर्बलाच्च बाल्याच्च भास्कराभ्याशमागत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बालक हनुमान्‌जी अपनी और अपने पिता की सहायता से कई हजार योजन आकाश पार करके सूर्यदेव के निकट पहुँचे॥29॥
 
In this way, with the help of himself and his father, child Hanuman crossed the sky several thousand yojanas and reached near the Sun God. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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