श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.35.27 
यदि तावच्छिशोरस्य ईदृशो गतिविक्रम:।
यौवनं बलमासाद्य कथं वेगो भविष्यति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यदि इस बालक में बचपन में ऐसा तेज और पराक्रम है, तो युवावस्था में इसकी क्या गति होगी? ॥27॥
 
"If this child has such speed and valour in his childhood, then what will be his speed when he attains youthful strength?" ॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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