श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.35.21 
शालिशूकनिभाभासं प्रासूतेमं तदाञ्जना।
फलान्याहर्तुकामा वै निष्क्रान्ता गहनेचरा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब अंजना ने उन्हें जन्म दिया, तो उनके शरीर का रंग शीत ऋतु में उगे धान के दाने के समान लाल था। एक दिन माता अंजना फल लाने के लिए आश्रम से निकलकर घने जंगल में चली गईं।
 
‘When Anjana gave birth to him, his body colour was red like the tip of the paddy crop grown in winter. One day mother Anjana left the ashram to bring fruits and went into the deep forest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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