श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.35.17 
बाल्येऽप्येतेन यत् कर्म कृतं राम महाबल।
तन्न वर्णयितुं शक्यमिति बाल्यतयास्यते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाबली श्री राम ! उन्होंने बाल्यकाल में ही जो महान् कार्य किये, उनका वर्णन नहीं किया जा सकता । उन दिनों वे बालक और अज्ञानी के समान जीवन व्यतीत करते थे ॥ 17॥
 
‘Mahabali Shri Ram! The great deeds he did even in his childhood cannot be described. In those days he lived like a child and an ignorant person.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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