श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.35.15 
सत्यमेतद् रघुश्रेष्ठ यद् ब्रवीषि हनूमति।
न बले विद्यते तुल्यो न गतौ न मतौ पर:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
रघुकुलतिलक श्री राम! हनुमान जी के विषय में आप जो कुछ कहते हैं, वह सत्य है। बल, बुद्धि और तेज में उनकी बराबरी करने वाला दूसरा कोई नहीं है॥ 15॥
 
Raghukultilak Shri Ram! Whatever you say about Hanuman ji is true. There is no one else who can match him in strength, intelligence and speed.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)