श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.35.13 
एतन्मे भगवन् सर्वं हनूमति महामुने।
विस्तरेण यथातत्त्वं कथयामरपूजित॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'देववन्द्या महामुने! प्रभु! हनुमान जी के विषय में ये सब बातें यथासम्भव विस्तारपूर्वक बताने की कृपा करें।
 
‘Devvandya Mahamune! Lord! Please tell all these things about Hanuman ji in detail as accurately as possible.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd