श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.34.6 
चतुर्भ्योऽपि समुद्रेभ्य: संध्यामन्वास्य रावण।
इदं मुहूर्तमायाति वाली तिष्ठ मुहूर्तकम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
रावण! ऋषिगण चारों समुद्रों से संध्याओपासना करके लौट रहे होंगे। कृपया कुछ क्षण प्रतीक्षा करें।
 
Ravana! The saints must be returning after performing Sandhyaopasana from all the four seas. Please wait for a few moments.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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