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श्लोक 7.34.42  |
तत: प्रज्वालयित्वाग्निं तावुभौ हरिराक्षसौ।
भ्रातृत्वमुपसम्पन्नौ परिष्वज्य परस्परम्॥ ४२॥ |
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| अनुवाद |
| तब वानरराज और राक्षसराज दोनों ने अग्नि प्रज्वलित करके एक दूसरे को हृदय से लगाकर भ्रातृत्व का बंधन स्थापित किया ॥42॥ |
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| Then both the monkey king and the demon king lit the fire and embraced each other with their hearts and established a bond of brotherhood. 42॥ |
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