श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.34.39 
त्रयाणामेव भूतानां गतिरेषा प्लवङ्गम।
मनोऽनिलसुपर्णानां तव चात्र न संशय:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'वानरराज! ऐसी गति केवल तीन तत्त्वों - मन, वायु और गरुड़ - के विषय में ही सुनी गई है। निःसंदेह, आप भी इस संसार में ऐसी तीव्र गति वाले चौथे प्राणी हैं।' 39.
 
‘Monkey King! Such speed has been heard of only in the case of the three elements- mind, air and Garuda. Undoubtedly, you too are the fourth one in this world to have such a fast speed. 39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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