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श्लोक 7.34.31  |
उत्तरे सागरे संध्यामुपासित्वा दशाननम्।
वहमानोऽगमद् वाली पूर्वं वै स महोदधिम्॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| उत्तर सागर के तट पर संध्यावंदन करके दशानन का भार वहन करता हुआ वह सागर के पूर्व की ओर चला गया । 3 1॥ |
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| After performing evening prayers on the shore of the North Sea, bearing the burden of Dashanan, he went to the eastern side of the ocean. 3 1॥ |
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