श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.34.2 
राक्षसं वा मनुष्यं वा शृणुते यं बलाधिकम्।
रावणस्तं समासाद्य युद्धे ह्वयति दर्पित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
अभिमानी रावण जिस किसी को भी शेखी बघारते सुनता, चाहे वह राक्षस हो या मनुष्य, उसके पास जाकर उसे युद्ध के लिए ललकारता॥ 2॥
 
The proud Ravana would approach anyone he heard boasting of, be it a demon or a human, and challenge them for a battle.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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