श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 33: पुलस्त्यजी का रावण को अर्जुन की कैद से छुटकारा दिलाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.33.20 
पितामहसुतश्चापि पुलस्त्यो मुनिपुङ्गव:।
मोचयित्वा दशग्रीवं ब्रह्मलोकं जगाम ह॥ २०॥
 
 
अनुवाद
दशग्रीव को मुक्त करके ब्रह्माजी के पुत्र मुनिवर पुलस्त्यजी पुनः ब्रह्मलोक चले गये। 20॥
 
After freeing Dashagriva, Brahmaji's son Munivar Pulastyaji again went to Brahmalok. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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