श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 33: पुलस्त्यजी का रावण को अर्जुन की कैद से छुटकारा दिलाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.33.13 
तं धर्मेऽग्निषु पुत्रेषु शिवं पृष्ट्वा च पार्थिवम्।
पुलस्त्योवाच राजानं हैहयानां तथार्जुनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब पुलस्त्य जी ने राजा अर्जुन से उनके धर्म, अग्नि और पुत्रों का कुशलक्षेम पूछा और उनसे इस प्रकार कहा- ॥13॥
 
Then Pulastya ji asked about the well-being of King Arjuna about his religion, fire and sons and said to him in this way - ॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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