श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.32.9 
पश्चिमेन तु तं दृष्ट्वा सागरोद‍्गारसंनिभम्।
वर्धन्तमम्भसो वेगं पूर्वामाशां प्रविश्य तु॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसने देखा कि जल का वेग पश्चिम से आकर पूर्व में प्रवेश करता हुआ बढ़ता जा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो समुद्र में ज्वार-भाटा आ गया हो॥9॥
 
‘He saw the velocity of the water coming from the west and entering the east and increasing. It looked as if there was a high tide in the sea.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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