श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  7.32.72 
राक्षसांस्त्रासयामास कार्तवीर्यार्जुनस्तदा।
रावणं गृह्य नगरं प्रविवेश सुहृद‍्वृत:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
उस समय कार्तवीर्य अर्जुन ने समस्त राक्षसों को भयभीत कर दिया और रावण को साथ लेकर अपने मित्रों के साथ नगर में आया।
 
At that time Kartavirya Arjuna frightened all the demons and taking Ravana with him he came to the city with his friends.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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