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ramayan 7.32.68: जैसे वर्षा ऋतु में समुद्र में बादलों की गति बढ़ जाती है, उसी प्रकार उन रात्रिचर जीवों की गति वहाँ आक्रमण करते समय बढ़ी हुई प्रतीत होती थी। 68।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  7.32.68 
नक्तंचराणां वेगस्तु तेषामापततां बभौ।
उद्भूत आतपापाये पयोदानामिवाम्बुधौ॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में समुद्र में बादलों की गति बढ़ जाती है, उसी प्रकार उन रात्रिचर जीवों की गति वहाँ आक्रमण करते समय बढ़ी हुई प्रतीत होती थी। 68।
 
‘Just as the speed of the clouds in the sea increases during the rainy season, similarly the speed of those nocturnal creatures seemed to have increased while attacking there. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)