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ramayan 7.32.61: लेकिन रावण वरदान के प्रभाव से मुक्त था; और इसलिए, रावण की छाती पर बहुत जोर से प्रहार करने के बाद भी, गदा उसकी छाती से टकराकर दो टुकड़ों में टूट गई और एक कमजोर गदा की तरह जमीन पर गिर गई।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.32.61 
वरदानकृतत्राणे सा गदा रावणोरसि।
दुर्बलेव यथावेगं द्विधाभूतापतत् क्षितौ॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
लेकिन रावण वरदान के प्रभाव से मुक्त था; और इसलिए, रावण की छाती पर बहुत जोर से प्रहार करने के बाद भी, गदा उसकी छाती से टकराकर दो टुकड़ों में टूट गई और एक कमजोर गदा की तरह जमीन पर गिर गई।
 
But Ravana was immune to the effects of the boon; and so, even after striking Ravana's chest with great force, the mace broke into two pieces on impact with his chest and fell to the ground like a weak mace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)