श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.32.5 
कार्तवीर्यभुजासक्तं तज्जलं प्राप्य निर्मलम्।
कूलोपहारं कुर्वाणं प्रतिस्रोत: प्रधावति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कृतवीर्यपुत्र अर्जुन की भुजाओं द्वारा रोका हुआ नर्मदा नदी का निर्मल जल, तट पर पूजा कर रहे रावण के पास पहुँचकर, उसी दिशा में उलटी दिशा से बहने लगा॥5॥
 
‘The pure water of the Narmada river, stopped by the arms of Arjun, son of Kritavirya, reached Ravana who was worshipping on the bank, and started flowing in the same direction in the reverse direction. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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