श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.32.48 
प्रहस्तं पतितं दृष्ट्वा मारीचशुकसारणा:।
समहोदरधूम्राक्षा अपसृष्टा रणाजिरात्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
प्रहस्त को धराशायी होते देख मारीच, शुक, सारण, महोदर और धूम्राक्ष समरांगण से भाग गये।
 
Seeing Prahastha collapsed, Marich, Shuka, Saran, Mahodar and Dhumraksha ran away from Samarangana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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