श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.32.46 
ततस्तमभिदुद्राव सगदो हैहयाधिप:।
भ्रामयाणो गदां गुर्वीं पञ्चबाहुशतोच्छ्रयाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'तब गदाधारी हैहयराज अपनी पाँच सौ भुजाओं से युक्त भारी गदा को घुमाते हुए प्रहस्त की ओर दौड़े।
 
‘Then the mace-bearer Haihayaraja, swinging the heavy mace which was carried and wielded by his five hundred arms, ran towards Prahasta.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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