श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.32.42 
तस्य मार्गं समारुद्धॺ विन्ध्योऽर्कस्येव पर्वत:।
स्थितो विन्ध्य इवाकम्प्य: प्रहस्तो मुसलायुध:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उस समय प्रहस्त मूसल लेकर विन्ध्यगिरि के समान स्थिर खड़ा हुआ उसका मार्ग रोककर खड़ा हो गया, जैसे पूर्वकाल में विन्ध्याचल ने सूर्यदेव का मार्ग रोक दिया था॥42॥
 
‘At that time, Prahastha, wielding a pestle and standing as still as Vindhyagiri, stood blocking its path, just like Vindhyachal had blocked the path of the Sun God in the past.॥ 42॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd