श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.32.38 
श्रुत्वा न भेतव्यमिति स्त्रीजनं स तदार्जुन:।
उत्ततार जलात् तस्माद् गङ्गातोयादिवाञ्जन:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर अर्जुन ने अपनी पत्नियों से कहा, ‘तुम सब लोग डरो मत।’ फिर उनके साथ वे नर्मदा के जल से उसी प्रकार बाहर निकल आए, जैसे कोई दैत्य (हथिनियों सहित) गंगाजी के जल से बाहर निकला हो।
 
Hearing this Arjuna said to his wives, 'All of you do not be afraid.' Then along with them he came out of the waters of Narmada in the same way as a giant (along with female elephants) came out of the waters of Gangaji.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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