श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.32.34 
इषुभिस्तोमरै: प्रासैस्त्रिशूलैर्वज्रकर्षणै:।
सरावणानर्दयन्त: समन्तात् समभिद्रुता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के योद्धा बाण, गदा, भाले, त्रिशूल और वज्रकर्षण नामक अस्त्रों से सब ओर से आक्रमण करके रावणसहित समस्त राक्षसों को घायल करने लगे॥34॥
 
Arjuna's warriors attacked from all sides with arrows, maces, spears, tridents and weapons called Vajrakarshan and started injuring all the demons including Ravana. 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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